Dushman Ko Barbad Karne Ki Dua Hindi Mein

Dushman Ko Barbad Karne Ki Dua Hindi Mein

Dushman Ko Barbad Karne Ki Dua Hindi Mein

दुश्मन को बर्बाद करने की दुआ हिंदी में, “अगर कोई व्यक्ति समाज में कमज़ोर हो जाता है, तो काफी संख्या में उसके दुश्मन बन जाते है। जब कोई इंसान किसी के लिए अच्छा सोचता है। उसके लिए अपनी अच्छी नीयत और सोच रखता है। आप यकीन नहीं करोगे कि वो ही शक्श आपका जानी दुश्मन बन जायेगा। अगर आपके दुश्मन आपको दिन रात परेशान करता है। आपका खाना पीना उतना बैठना सब हराम कर रखा हो। उसके लिए हम Dushman Ko Barbad Karne Ki Dua Hindi Mein बताएंगे।

अब आप लोगो के लिए बुरे इंसान बन जाओगे, तो कोई भी आपसे दुश्मनी करने से पहले एक हज़ार बार सोचेगा। अगर लोग आपका अच्छा चाहते है, आपको पसंद करते है, तो उनके साथ अच्छे से रहे। जब कोई आपको बुरा बोलता है, तो आपको एक कान से सुनना है, और दूसरे काम से बाहर निकाल देना है। अपने दुश्मन को ऐसा दिखाये की आपको उनकी बातों का बिलकुल भी फर्क नहीं पड़ता है।

कभी ज़िन्दगी हम ऐसी गलती कर देते है। जिसकी सजा हमे पूरी ज़िन्दगी भर चुकानी पड़ती है। अगर आपकी लाइफ में कोई ऐसा दोस्त या परिवार का कोई सदस्य है। जो हमेशा आपके बारे में बुरा सोचा है। आपके लिए बुरा करता है। तो आज ही उससे व्यक्ति से हमेशा के लिए दूरी बना लीजिए। क्योंकि अगर आप उस व्यक्ति से दूर नही हुए तो वो एक दिन आपका जानी दुश्मन बन जायेगा। जो आप ऐसा बिल्कुल भी नही चाहते है।

दुश्मन भी होते है, जो आपके सामने बिलकुल मीठी बातें बोलते है। और आपके पीठ पीछे लोगो के सामने आपकी बुराई करते है। आपको ऐसे दुश्मनों से हमेशा दूर ही रखना चाहिए। दुश्मनों से बचने के लिए हम आपके लिए एक बहुत ही बेहतरीन दुआ बताये आये है। इस दुआ से आपका दुश्मन गलती से भी आपके सामने नहीं आएगा।

दुश्मन को बर्बाद करने की दुआ

इंसान की सबसे बड़ी गलती यह होती है, की वो अपने दुश्मन को कमजोर समझता है। ऐसे में दुश्मन को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। अपने दुश्मन आपके सामने कुछ ऐसा काम करेगा, जिससे आपको गुस्सा आ जाये।और गुस्से में आप कुछ ऐसा कर जाते है, जो आपकी मुसीबत बन जाता है। इसलिए हमेशा सयम से काम ले। जब आपके दुश्मन आपको उकसाने का प्रयास करता है, तो आपको अपने दिमाक को ठंडा रखना है।

इसलिए हम आज दुश्मन की तबाह और बर्बादी के लिए आपके लिए एक दुआ और वज़ीफ़ा बतायेगे। जिस पढ़ने के बाद आपके दुश्मन आपके पैरों में गिरकर आपसे माफ़ी मांगेगा। आपके सामने ही अपनी की गई गलतियों पर शर्मिंदा होगा। इस दुआ के असर से दुश्मन आपसे बहुत दूर चला जायेगा। आपके सामने कभी दिखाई तक नहीं देगा।

  • इस अमल को आपने 3 दिन तक लगातार करना है।
  • आपने इस्लामिक महीने की 15 तारीख की सुबह से अमल शुरू करना है।
  • एक मुट्ठी पाक और साफ़ मिट्टी ले। और मिटटी के ऊपर अपने दुश्मन का एक फोटो रख देना है।
  • ज़ोहर की नमाज़ के बाद 100 बार सौराह कौसर पढ़ लेना है। और सुर्ख लाल मिर्च से दुश्मन का फोटो जला देना है।
  • अगले दिन उस मिटटी को दुश्मन के घर के बाहर फेंक देनी है। अगर दुश्मन आपके घर के पास नही है, तो उस मिटटी को बहते हुए पानी में बहा देनी है।
  • इतना करने के बाद अपने बिना पीछे देखे अपने घर आ जाना है, और वज़ू कर लेना है।

इसको करने के बाद आपके दुश्मन आपके पैरों के तलवे चाटने को मजबूर हो जायेगा। इस दुआ से आपका दुश्मन बर्बाद तो जरुर होगा। कुछ ही दिनों में आपकी आँखों के सामने दुश्मन की बुरी हालत देखने को मिलेगी। उसके साथ ही उसको अपने किये हुए बुरे कामों की सजा मिलेगी। इस दुआ को आपको तब ही पढ़ना है, जब कोई इंसान आपको बेइन्ताह परेशान करता हो। किसी गरीब और लाचार व्यक्ति पर इस दुआ का इस्तेमाल कभी न करे।

आपने जिस दिन अपने गुस्से पर काबू पा लिया उस दिन आपके दुश्मन आपका गुलाम बन जायेगा। दुश्मन हमेशा पीछे से वार करता है। आपको बर्बाद करने के लिए वो कोई भी कसर नहीं छोड़ता है। दुश्मन आप पर काला जादू भी करवाता है। काला जादू के असर से आपका घर तबाह हो जाता है, और आपका कारोबार जो बहुत अच्छे से चलता है। अचानक कुछ ऐसा होता है, की कारोबार बिलकुल खत्म हो जाता है। घर में सभी सदस्य बीमार रखने लग जाते है।

किसी को बर्बाद और तबाह करने की दुआ

किसी को बर्बाद और तबाह करना चाहते है, तो इस क़ुरानी दुआ को जरुरी पढ़े। जब शादी होती है, तो थोड़े दिनों तक सास और बहू के बीच बहुत ठीक से चलता है। लेकिन शादी के कुछ साल बाद ही सास और बहू एक दूरसे की दुश्मन बन जाती है। एक ही घर में रह कर दोनों एक दूसरे को खरी खोटी सुनती है। सास बहू एक दूसरे को घर से निकलने की भी कोशिश करती है। इस दुआ को सास और बहू दोनों एक दूसरे के विपरीत कर सकती है। अगर सास अपनी बहू के लिए इस दुआ को पढ़ती है, तो बहू की बोलती सास के सामने बंद हो जाएगी। और अगर बहू सास के लिए करती है, तो सास की हमेशा के लिए ज़ुबान बंद हो जाएगी।

आपके दिल जब में बदले की आग जल रही हो। इसे बुझाया जा सकता है केवल हम उस व्यक्ति को डांटते हैं। आज हम आपको बताएंगे की दुश्मन से बदला कैसे लिया जाता है। बदला लेना ऐसा है जैसे हम हाथ में जलता हुआ कोयला पकड़े हुए हैं। और उस व्यक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं जिस पर हम इसे फेंकना चाहते हैं।  वह व्यक्ति इस कोयले से जलेगा या नहीं लेकिन तुम अभी इससे जल रहे हो। तो बदला लेने का यह विचार ऐसा ही है।

लेकिन आम तौर पर लोग कहते थे कि हमें सुकून मिलेगा। हम उसे बुरी तरह डांटते हैं। लेकिन देखिए उस शख्स को सजा मिलती है या नहीं। लेकिन आप आराम करना चाहते हैं ना। इसलिए अपने दिमाग में आपको पहले आराम करना होगा। नहीं तो बदला लेने की मानसिकता कुछ ऐसी ही होती है।

आपने अपने हेड रेंट फ्री में किसी को जगह दी है। अगर कोई अपना कमरा किसी को देता है तो वह उसका किराया लेता है। लेकिन आपने किसी को अपने सिर और दिल के किराए से मुक्त रखा है। और आप इससे पीड़ित हैं। इसलिए कहा जाता है कि बदला की मानसिकता वाला व्यक्ति दो कब्र खोदता है, दूसरे व्यक्ति की कब्र खुद खोदता है। तो वास्तव में यह एक ऐसी बुरी सोच है जो व्यक्ति के जीवन को दुख से भर देती है।

दुश्मन को जलील करने का अमल

अक्सर आपने देखा होगा, की जो लोग पैसे वाले होते है। वो छोटे और गरीब लोगो से बतमीजी से पेश आते है। सभी के सामने उनको ज़लील कर देते है। ऐसा ही अगर आप किसी ऑफिस में काम करते है। वह का मालिक सभी कर्मचार्यो के सामने आपको जलील करता है, आपको भला बुरा कहता है। ऐसे में आप मानसिक तौर पर परेशान होने लगते है। दिल में बदले की भावना पैदा हो जाती है। आप भी चाहते है, की दुश्मन को जलील करना है, तो अपके लिए एक कमाल का अमल लेकर आये है।

जैसे बिच्छू आग में जल रहा हो। वह खुद को डंक मारता है और वह मर जाता है। वह बाद में जलता है लेकिन अपने ही डसने से पहले मर जाता है। ऐसे में बदला लेने की सोच में जलने वाला इंसान खुद को सजा दे रहा है। और जब हम बदला लेने की यही मानसिकता रखते हैं तो क्या होता है। यह कर्म के मैट्रिक्स को और भी जटिल बना देता है।

  • अगर आपके पास दुश्मन का फोटो नहीं है, तो आप इस अमल को करे।
  • ताम्बे के लोटे में पानी डालकर उसमे थोड़ा कच्चा दूध मिला दे। जो हम आपको तावीज़ देंगे. उसे सफ़ेद कागज़ पर काली स्याही से लिखना है।
  • अ-लम त-र क़े फ फ-अ-ल रब्बु-क वि-अशबीलफिल (१) अ लम यज् अल कैधउम फ़ि तजलीलिव (१) व अरस- लकैधउम अबाबील (२) तमीहिम् बिहिजा-रतिम  मिन सिज्जीलिन (३ ) फ़-ज-अ लहुम क़-अअहुम म कूल (४ )
  • उसके बाद तावीज़ वाले कागज़ को ताम्बे के लोटे में पूरी रात भिगोकर किसी ऐसी जगह रखना है, जहा उससे कोई छू न सके।
  • अगले दिन सुबह १ बजे बिना किसी से बात किये हुए। दुश्मन के घर जाकर वो अपनी उनके पेड़ या पोधो में डाल देना है।
  • इंशा अल्लाह थोड़े ही समय में आपका दुश्मन खुद ब खुद सबके सामने ज़लील हो जायेगा।

अगर किसी ने आप पर कोई काला जादू या सिफलि इल्म करवाया है, तो इस अमल से सब जादू और इल्म ख़तम हो जायेगे। किसी से आपकी थोड़ी बहुत लड़ाई हुई हो, तो उसको माफ़ कर दीजिये। क्योकि यह अमल बहुत ही खतरनाक है। इसको करने के बाद दुश्मन का तड़पना शुरू हो जायेगा। वो बीमार हो जायेगा।

आप उसे दण्डित करना चाहते है। तो वह आपसे बदला लेगा, फिर आप उससे बदला लेता हूं। इसलिए, कर्म का यह मैट्रिक्स इतना जटिल हो जाता है। कि यह व्यक्ति के दिमाग को और भी जटिल बना देता है। और वह व्यक्ति जिसका मन जटिल है। वह अपने जीवन में कभी खुश नहीं होगा। इसलिए बदला लेना ठीक नहीं है। लेकिन एक काम करो जिससे तुम बदला लेना चाहते हो ना। कृपया उसे क्षमा करें।

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